
गृहस्थ जीवन” उन किताबों में से है जो आध्यात्मिकता को सिर्फ आश्रम या एकांत तक सीमित नहीं रखती, बल्कि रोज़मर्रा की जिंदगी—रिश्तों, परिवार और जिम्मेदारियों—के बीच समझने की कोशिश करती है। किताब यह सवाल उठाती है कि क्या सच में गृहस्थ जीवन आध्यात्मिकता के खिलाफ है, या हम ही उसे गलत तरीके से जी रहे हैं। यह बात काफी relatable लगी, क्योंकि आमतौर पर लोग दोनों को अलग मानते हैं। मुझे इसमें यह अच्छा लगा कि यह ...
अपने आप को समझना बहुत जरूरी है। आकर्षण प्रेम नही होता । प्रेम तो बस एक से ही होता है -सत्य । पति पत्नी एक मित्र हैं जो एक दूसरे को उंचाई तक पहुंचाने में सहायता करते हैं, न तनाव लो न तनाव दो । गृहस्थ होने से पहले गृहस्थी क्या है ? जानिए । यह पुस्तक जरूर पढ़े।

यह पुस्तक गृहस्थी का सही अर्थ समझाती है। इस पुस्तक मे बहुत ही अच्छे तरीके स बताया गया है की असली गृहस्थी बिना अध्यात्म के संभव नहीं है और ऐसा कोई घर है, जिस घर मे लोग साथ मे रह रहे है लेकिन अध्यात्म के लिए जगह नहीं है तो वो घर, घर नहीं बस ईटों के कुछ कमरे भर है और लोगो मे कोई प्रेम नहीं है वो बस स्वार्थ या संयोग से बस जुड़े है। हमें अध्यात्म को केंद्र मे रखकर गृहस्थी बसानी चाहिए, और उसी गृहस्थी मे...
जैसा की आपने मेरा टाइटल पढ़ा होगा जी बिलकुल मैं बाल-बाल बचा वों भी सिर्फ आचर्य जी के इस पुस्तक को पढ़ कर मैंने ये जाना की वास्तव में हम जैसे समझते हैँ अपनी शादी को वैसा कुछ भी नहीं होता चीजे उनसे बिलकुल अलग होती हैँ, हम बस गोरी चमड़ी, मोटी दहेज, और रसूखदार परिवार देख कर शादी करते हैँ जो सुरुवाती के दो ढाई महीने तीन महीने और कभी कभी एक साल तो अच्छे से चलते हैँ लेकिन फिर से हमारी (दोनों) खोज सुरु हों ज...