
प्रकृति से हमारा संबंध कैसा होना चाहिए, इस पुस्तक के माध्यम से इस पर स्पष्टता प्राप्त हुई। जब तक इंसान प्रकृति को भोग की वस्तु समझता रहेगा, वह स्वयं का ही नुकसान करता रहेगा। यह मानो स्वयं को ही भोगने और स्वयं को ही हानि पहुँचाने जैसा है, क्योंकि हम भी प्रकृति ही हैं। देवी माँ को प्रकृति की पालनकर्ता क्यों कहा जाता है, सिंह और अन्य पशु किसके प्रतीक हैं—इस पर भी स्पष्टता मिली। बहुत कुछ समझ में आया।...