मैं बचपन से दुर्गा पाथ कर रही हूँ, किंतु जब मैंने आचार्य जी की यह पुस्तक पढ़ी तो दुर्गा सप्तशती का सही अर्थ समझ में आया।दिमाग़ खुल गया ।