
इस पुस्तक ने मुझे आत्मबोध की दिशा में एक स्पष्ट और मजबूत आधार दिया। आदि शंकराचार्य की जटिल संस्कृत रचनाओं को आचार्य प्रशांत जी ने इतनी सरल, तार्किक और आधुनिक भाषा में प्रस्तुत किया है कि जीवन के गहरे प्रश्नों के उत्तर मिलने लगे। यह किताब सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, आत्म-अवलोकन और गहराई से जीने के लिए है। भ्रम टूटते हैं, और सच्चाई सामने आती है। हर जिज्ञासु को इसे पढ़ना चाहिए।