
अपना समय अपने से आगे के किसी काम को अर्पित कर दो।अपना समय अपने से बड़े किसी लक्ष्य को आहुति दे दो। ~आचार्य प्रशांत एक आदमी खाली बैठा-बैठा और क्या कर रहा है, खुद को खा रहा है ! यह बात आचार्य जी ने इस पुस्तक में एकदम सटीक तरीके से समझायी है। Must read this book ✨