"आचार्य प्रशांत जी की ‘समय’ ने मेरी दृष्टि ही बदल दी — इसने न सिर्फ मुझे समय का मूल्य समझाया, बल्कि मुझे अपने जीवन का वास्तविक प्रबंधक बना दिया। आज जो भी सफलता है, उसकी जड़ में यही समझ है।"