
अगर आप भी अपने 'खाली समय' और 'पर्सनल टाइम' को लेकर कन्फ्यूज हैं, तो यह किताब आपके लिए ही है। आचार्य प्रशांत जी ने बहुत ही प्रैक्टिकल तरीके से बताया है कि हम अपना समय क्यों और कैसे बर्बाद करते हैं। 'अहंकार' और 'समय के दुरुपयोग' जैसे मुश्किल विषयों को उन्होंने इतने आसान तरीके से समझाया है कि सब कुछ साफ़-साफ़ दिखने लगता है। इस किताब को पढ़ने के बाद आप अपने समय को देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल देंगे। अब ...