
साध्य नहीं, साधन

प्रकृति” एक ऐसी किताब है जो हमें प्रकृति के साथ हमारे रिश्ते को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करती है। इसे पढ़ते हुए मुझे एहसास हुआ कि हम अक्सर प्रकृति को सिर्फ संसाधन के रूप में देखते हैं, जबकि वास्तव में हम उसी का हिस्सा हैं। किताब बहुत सरल भाषा में यह समझाती है कि पर्यावरण की समस्याएँ केवल बाहरी नहीं हैं, बल्कि हमारे अंदर की असंतुलित जीवनशैली और सोच का परिणाम हैं। मुझे खास तौर पर यह बात बहुत...

BOOK DOES NOT DESERVE FIVE STARS / IT DESERVES THE WHOLE UNIVERSE.. मेरे अंदर के योद्धा ने हरा दिया है मुझे कैसे जीना है यह सिखा दिया है मुझे । मैं मैदान में आने से पहले हारा हुआ था प्राकृतिक की खूबसूरत रचना रावण से डरा हुआ था मैं जल रहा था बुझा दिया है मुझे मेरे होश योद्धा सारथी ने हरा दिया है मुझे कैसे जीना है यह सिखा दिया है मुझे