
हमने अक्सर सुना है कि लोग कहते रहते हैं कि 'सब मोह माया है'। वे लोग बिना बात की गहराई को समझे ही ऐसा कह देते हैं। माया में वे अपने सुख और स्वार्थ को शामिल नहीं करते। उन्हें न तो माया के बारे में कोई बोध होता है और न ही वे अपने आप को समझते हैं। यह बात अक्सर वे लोग कहते हैं, जिन्हें जीवन में कुछ करना-धरना नहीं होता। उनका ऊंचाइयों से कोई रिश्ता नहीं होता और वे इस बात का उपयोग कुछ चीज़ों से भागने के ल...

गौरव जी, यहाँ एक बात ध्यान देने लायक है। जिन लोगों की आप बात कर रहे हैं, वे माया को अपनी सुविधा से काट कर इस्तेमाल करते हैं, यह आपने सही देखा। पर अब यही जांच अपने ऊपर भी करिए। 'वे भाग रहे हैं' यह निष्कर्ष निकालकर आप खुद किस चीज़ से मुक्त महसूस कर रहे हैं? दूसरों की पलायनशीलता पहचान लेना अपनी ज़िम्मेदारियों को देखने से ज़्यादा आसान है। माया की समझ तब काम की है जब वह यह पूछे कि मैं खुद अपने किन सुखो...