
पहले नवरात्रि का अर्थ सिर्फ देवी के विशाल काय शरीर और हथियारों, अस्त्रों- शस्त्रों से लेना देना था। पूजा-पाठ, प्रसाद, संगीत इन्हीं से ही लेना देना था देवी आएंगी पाप बढ़ेगा तो ऐसी तमाम मान्यताएं थी लेकिन अब नहीं अब देवी वास्तव में मां स्वरूपा हैं,मुक्तिदायिनी हैं, प्रकृति ही देवी है और जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ करेगा वो निश्चित ही बंधन और दंड का भागी होगा।