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Paperback Details
HindiLanguage
198Print Length
Description
देशभर में नवरात्रि तो बड़े धूमधाम से मनायी जाती है, पर क्या हम इस पर्व के मर्म को समझते हैं? हम जिन दुर्गा माँ की पूजा करते हैं अर्थात् महिषासुरमर्दिनी, उनका चरित्र कहाँ से आया है? ये असुर और उनका संहार करने वाली माँ किनके प्रतीक हैं? यह असुर संहार हमारे दैनिक जीवन से कैसे संबंधित है?
इन सबका उत्तर है श्रीदुर्गासप्तशती ग्रंथ। जो स्थान श्रीमद्भगवद्गीता का वेदांत में है, वही स्थान श्रीदुर्गासप्तशती का शाक्त सम्प्रदाय में है। शाक्त सम्प्रदाय हिन्दू धर्म का ही अंग है क्योंकि इसकी उत्पत्ति वैदिक परंपरा से हुई है और इसके आधार वेद हैं। शाक्त सम्प्रदाय सत्य के नारी रूप अथवा देवी रूप की उपासना करता है। और देवी की उपासना कई अर्थों में हमारे लिए ज़्यादा उपयोगी है क्योंकि शिव तो निराकार हैं, उनसे क्या सम्बन्ध बना सकते हैं हम? सम्बन्ध तो सगुणी प्रकृति से ही बन सकता है। और यही सम्बन्ध निर्धारित करेगा कि हम भवसागर से तरेंगे कि भवसागर में डूबेंगे।
श्रीदुर्गासप्तशती में तेरह अध्याय और सात-सौ श्लोक हैं। इनमें तीन चरित्र हैं अर्थात् तीन तरह के राक्षस जो हमारे तीन तरह के अज्ञान — दम्भ, मद और मोह के प्रतीक हैं। इन राक्षसों का संहार करने वाली देवी प्रकृति के तीन गुणों का प्रतिनिधित्व करती हैं। प्रथम चरित्र में तमोगुणी महाकाली हैं, दूसरे चरित्र में रजोगुणी महालक्ष्मी और तीसरे चरित्र में सतोगुणी महासरस्वती हैं। नवरात्रि में देशभर में जिन दुर्गा माँ की पूजा की जाती है वह महिषासुरमर्दनी का रूप दूसरे चरित्र से आता है।
आचार्य जी ने तीनों चरित्रों को बड़े सरल, सुगम भाषा में विस्तृत और रोचक तरीके से समझाया है। यह पुस्तक आपको देवी उपासना के महत्व को तो बताएगी ही, साथ-ही-साथ देवी उपासना, जो केवल कर्मकांड और पाखंड से भरपूर एक हुल्लड़बाज़ी बन गयी है, उसके विपरीत आपके हृदय में माँ दुर्गा के प्रति एक सच्ची श्रद्धा जागृत करने में सहायक होगी। और आप यह समझ पाएँगे कि देवी जिन असुरों का संहार करती हैं वो और कोई नहीं बल्कि हमारी ही वृत्ति और कुत्सित वासनाएँ हैं।
Index
CH1
देवी उपासना का रहस्य और उद्गम
CH2
माया: न समझो तो बन्धन, समझ गए तो मुक्ति का द्वार
CH3
भगवती महामाया — दुख की स्रोत भी और मुक्तिदायिनी भी
CH4
क्या मूल अहम् वृत्ति ही देवी महामाया हैं?
CH5
क्या शक्ति ही शिव का द्वार हैं?
CH6
माया या प्रकृति को हमेशा स्त्रीलिंग में ही क्यों सम्बोधित किया जाता है?
इस पुस्तक को पढ़कर पता चला देवी कौन है ❓ माया क्या है और हम सबकुछ जानते हुए भी बार बार माया में क्यों फंसते हैं।
Saras Garg
9mo
Helps me to find the center from where all my decisions comming from
I am not religious person according to popular religion but why these books of Acharya Prashant must read is because you have never seen the world like this before
Also you have to be with these types of books all the time so that you can know yourself at the best
Satyam dhardwivedi
1y
शक्ति की उपासना का उच्चतम अर्थ
दुर्गासाप्तशती ग्रन्थ के इस भाष्य को पढ़ने के बाद जो स्पष्टता मिली वो अद्वितीय है। देवी के तीनो रूप और हमारे जीवन में उनके महत्व हो बड़े विस्तार से समझाया गया है। मानव जीवन में देवी की उपस्थिति और मानव जीवन की मूल समस्या को समझने के लिए यह पुस्तक बहुत उपयोगी है।
SHILPI BHATT
1y
मां 🙏 ही सब, सब 🌍में मां 🙏
🪔दुर्गा सप्तशती बहुत बार पढ़ी थी।
परंतु आचार्य जी 🙏 ने ही सबसे उच्चतम अर्थ बताया।
यह कोई पौराणिक कथा नहीं। यह तो निरंतर चलने वाला खेल है।
राक्षस भी हम और देवता भी हम।
धन्यवाद PAF टीम🙏