बहुत हास्यास्पद और बालक कहानी जैसे चरित्र लगे थे जब कुछ थोड़ा बहुत पुस्तक का हिस्सा कही सून पढ़ या देख लेते थे, आचार्यजी के माध्यम से माँ देवताओं और असुरों का असली अर्थ समझ आया तब लगा कि ये ग्रन्थ भी सारगर्भित और व्यवहारिक है ।। बहुत धन्यवाद सर