
ब्रह्म के सगुण हो जाने को देवीत्व कहते हैं। शिव से अनन्य हैं शिवानी; महादेव से अभिन्न हैं भवानी। तो आप यह नहीं कह सकते कि मैं ब्रह्म उपासक हूँ लेकिन शक्ति से मेरा कोई संबंध नहीं। आप शिव-शिव करते रह जाएँगे, शक्ति से अगर आपका कोई संबंध नहीं तो कुछ नहीं पाएँगे। क्योंकि शिव से तो आप संबंध बना ही नहीं सकते, शिव तो असंबद्ध हैं। निराकार हैं शिव, उनसे क्या संबंध बनाओगे? संबंध तो सगुणी प्रकृति से ही बन सकत...