देवता और दानव का जो हमारे मन में छाप थी, पुस्तक पढ़ने के साथ ही समझ में आया कि हमारे मन के भीतर ही देवता और दानव छुपे होते है। जीवन में आपको फैसला करना है कि आप चुनाव किसका करते है, और किस केंद्र से करते है।