
हम अपनी कामनाओं की पूर्ति के लिये पृथ्वी का उपभोग कर रहे हैं । हमें लगता है कि इससे हमे संतुष्टि मिल जायेगी । संतुष्टि तो नहीं मिलती है और हमारी इसके प्रति भोग वृत्ति और बढ़ जाती है । पृथ्वी में जो बदलाव आ रहे है वो ही हमारे विनाश के कारण है। ये बदलाव मनुष्य के अज्ञान के कारण ही आ रहे हैं ।इसका एक ही समाधान है ज्ञान । वो ज्ञान सिर्फ गीता से ही मिलेगा ।