
कैसे हम इंसानो ने अपनी भोगवादी मानसिकता और वृत्तियों के चलते स्वयं को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण पृथ्वी और उनकी समस्त संतानों (जानवर, पक्षी, जलचर एवं अन्य) को विनाश और भीषण तबाही के करीब ला दिया इसका हम अनुमान भी नहीं लगाना चाहते। कल कुछ 20 - 30 सालों में धरती वैसी नहीं रहेगी जैसी आज है, आज से भी कई गुना बुरी हालत में पहुंच जाएगी। कुछ पूंजीपतियों के बड़े सपनों ने हमारी धरती माँ को आज पूरा जर्ज़र बना दिय...