दिल्ली से जब दक्षिण में नौकरी करने आया, तो वजन को देखते हुए भी आचार्य जी की 2 बुक लेके चला, जिसमें से एक बोधसूत्र थी। कही भी जाता हूं, यह रहती है हमेशा पास में बैग में।