
ये बहुत ही प्यारी और बोधपूर्ण किताब है। इसमें लिखी गई हर युक्ती में गहराई, सरलता और स्पष्टता है। इस किताब में आचार्य जी द्वारा बताया गया हैं कि 'व्यक्ति किस तरह से कामना, डर और लालच की वजह से व्यर्थ जगह पर अपना समय ख़राब कर देता है और फ़िर बाद में अपने किए पर दुःखी रहता है, अपने दुःख का कारण वह स्वयं रहता है। वह व्यर्थ कामों में अपना समय नष्ट करता है ताकि सही काम न करना पड़े। हमारे जीवन में कुछ ऊं...

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