
हमारी हालत अर्जुन जैसी है, जैसे अर्जुन मोह, डर, पूर्वाग्रह से ग्रस्त हैं वैसे ही हम भी अपने जीवन में हर क्षेत्र में मोह, डर, मान्यताओं से बंधे हुए हैं, हमे अर्जुन की तरह युद्ध में डटे रहना है, जब श्रीकृष्ण अर्जुन को गीता ज्ञान दे रहे थे तब वो डटे रहे, ऐसे ही हमे भी आचार्य जी से गीता ज्ञान लेते समय डटे रहना है, मुझे इस बुक को पढ़ने से बहुत स्पष्टता मिली है, गीता को जीवन में उतारने से जीवन बेहतर हुआ...