
हमारे पास भगवद्गीता के होते हुए भी हम इतने सालों तक गुलाम रहे, इतने युद्ध हारे, कैसे? आज ये पुस्तक पढ़ कर समझ आया। हम केवल इंतजार ही करते रहे कि कृष्ण बाहर कहीं प्रकट होंगे और धर्म की रक्षा करेंगे। उन्हें तो हमें अपने भीतर से प्रकट होने देना था, जैसे अर्जुन ने होने दिया।