वक़्त रहता है, घड़ी की सुइयां चलती हैं, पर वक़्त का महत्त्व बहुत नहीं रह जाता. भूत-भविष्य खेल मात्र रह जाते हैं. लीला. वापस आ जा, भूले मन…!