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Paperback Details
HindiLanguage
128Print Length
Description
भारत की राजनीतिक आज़ादी के दशकों बाद भी हम अनेक तरीकों से कैद हैं - सामाजिक, मानसिक, भावनात्मक रूप से। आचार्य प्रशांत कहते हैं: तब दुश्मन स्पष्ट था, आज का दुश्मन छिपा हुआ है. आज दुश्मन आपका हितैषी बनकर वार कर रहा है।
आज़ादी 2.0 सिर्फ़ एक किताब नहीं है, यह आचार्य प्रशांत द्वारा दिए उन गहरे संवादों का संकलन है जो आपको वास्तविक स्वतंत्रता से परिचित कराती है। इस पुस्तक का उद्देश्य आज़ादी को लेकर कोई सतही शोर-गुल करना नहीं बल्कि सालों पुरानी ग़ुलामी के पीछे छुपे कारणों को समझना है। वही कारण जो आज आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी आपके-हमारे बीच न केवल अपनी जड़ें जमाए हुए हैं, बल्कि और अधिक गहराई पा रहे हैं। वही कारण जो आपके और आपकी उच्चतम संभावना के बीच की बाधा हैं।
यह पुस्तक आपको उस व्यक्ति से मिलवाएगी जो आप हो सकते हैं। उस जीवन से मिलवाएगी जो आप जी सकते हैं। उस आकाश से मिलवाएगी जिसमें आप उड़ान भर सकते हैं।
आज़ादी 2.0 पढ़कर मुझे यह समझ आया कि असली आज़ादी केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि हमारी सोच और मानसिकता से जुड़ी होती है। हम अक्सर खुद को आज़ाद मान लेते हैं, लेकिन इस किताब ने दिखाया कि हम कितनी चीज़ों से भीतर ही भीतर बंधे हुए हैं।
आचार्य प्रशांत ने बहुत स्पष्ट तरीके से बताया है कि समाज, डर, और हमारी अपनी धारणाएँ किस तरह हमारी स्वतंत्रता को सीमित करती हैं। पढ़ते समय कई बार ऐसा लगा कि यह सिर्फ...
Rahul Singh
1y
सुंदर प्रस्तुति
जरूर पढ़िए ओर आजादी क्या चीज है निष्पक्ष होके समझिए