
शायद मुझे ऐसा लगता है, और कभी कभी मै इस चीज को लेकर मै गहरे विचार धारा में चला जाता हूं कि मैं एक तरफ आचार्य जी की शिक्षा को अपने जीवन में ला रहा हूं ताकि मै अहम, यही मै को विगलित करते हुए आगे बढ़ूं। मै अपनी जिंदगी की आजादी खुलकर जी सकू। मै अपने जीवन के प्रति फैसले भी खुद ले सकू। लेकिन फिर मै अपने बाधाओं और बंधनों को देखता हूं कि क्या है और क्या करना है मुझे उसके लिए मुझे वो तो बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए जो अब तक करते हुए आ रहा हूं। मै अपने भीतर के डर, लालच, स्वार्थ कामना सभी को कम करता आ रहा हूं और अपनी निर्भरता भी। बस मुझे कुछ और जोखिम उठाने है अपने जीवन को आजाद करने के लिए।



















