
🔥📚श्रीकृष्ण जन्माष्टमी सत्र गोवा 🛑अवलोकन📝 🏹🔥श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर सत्र के लिए Goa जाना अपने आप में बहुत कुछ सीखा गया। जब 🌴Goa में होने जा रहे session के लिए confirm हुआ तो कुछ अलग ही रोमांचक और अचंभित करने वाला था। 🌴Goa मेरे लिए नयी जगह थी में पहले कभी ऐसे इतनी दूर बाहर नहीं गया था,लेकिन आचार्य जी के कारण ही यह संभव हो पाया। 📝मेरे लिए बाहर घूमना या दूसरे लोगों के culture को जानना, मान्यताओं को समझना मेरे खुद के दायरे में तो सीमित ही रहता है 🌊 गोवा में समुद्र की लहरों को पहली बार देखना मेरे लिए नया था और साथ में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर गीता 📚 सत्र मानो दोनों ही मिलकर मेरे भीतर के उस सीमित दायरे का आलिंगन कर रहे हो। 🏄पहली बार समुद्र के पानी को अपने पैरों से, हाथों से छूना रोमांचक था। भीतरी स्थिति जो हर समय कहती है जैसे हो वैसे ही रहो , जैसे अभी हो, जैसे कि कल थे। 🏝️ लहरें उस पर गहरी चोट कर रही हो,🌴 समुद्र के तट पर जो बिखरी रेत, उस पर पड़ रही 🌤️सूरज की किरणें मेरे भीतर के अंधकार को चुनौती दे रही हो और कभी-कभी समुद की उफनती लहरें भयानक भी प्रतीत होती। वह चाह रही हो की आसमान की और बढ़ना है तो मेरे प्रकोप से होकर गुजरना होगा। उसका बार-बार मुझे गिराना फिर वापस पीछे हटकर मौका देना जैसे वह जीवन का कुछ सिद्धांत समझाना चाह रही हों। लेकिन उस समय कुछ खास समझ नहीं आ रहा था। कभी लगता की सहज प्रवाह जो बिना रुकावट के जो मेरे जीवन से बिल्कुल अलग है। कहने को तो यह एक 🏞️प्राकृतिक घटना है जो लगातार घट रही है मगर शायद बहुत कुछ सीखा भी रही थी। 🌴गोवा को जब दुनियां 🌍देखती हैं तो वह भोग और कामना के उद्देश्य से ही देखती है। 🏹गीता का जीवन में होना माने प्रकृति को भोग की दृष्टि से नहीं देखना बल्कि सरल, सहज, जैसे कोई बच्चा बाहरी दुनिया को देखता है, सवाल उठाता जिज्ञासा करता है। में अन्य ऐतिहासिक जगहों पर भी गया जो बहुत कुछ सीखा रही थी , एक सहज आनंद था, अगर जीवन में गीता और अध्यात्म नहीं होता तो मेरे लिए दुनिया भी भोगने के लिए ही होती। 🪔सत्र में आचार्य जी का हम सब के लिए संघर्ष भीतर कुछ तोड़ रहा था, वह उनकी तबियत ठीक नहीं थी। 😡अहंकार हमेशा संघर्ष से मुँह चुराता है। वह आईने से खुद को बचा रहा था कहीं सच 🪞 सामने न आ जाए, वह मानने को तैयार ही नहीं है कि यह संघर्ष उसके लिए ही है। 🌴गोवा session में community के सदस्य भी गए थे, जो बहुत कुछ सीखा रहे थे। उनकी संगति एक-दूसरे की समझ, ज्ञान,विवेक अलग नजरिया जो हम सभी ने सत्रों से आचार्य जी से सीखा था नजर आ रहा था, जो हमारे चुनावों को और भी बेहतर बना रहा था और असली आजादी महसूस हो रही थी। 🕊️यह आजादी सीखा रही थी कि दुनियां में बड़ी संख्या में और भी लोग हैं, पशु-पक्षी हैं, जीव-जंतु हैं जो यह आजादी चाहते हैं। उन तक भी यह आजादी पहुंचानी है जो गीता के माध्यम से ही पहुंच सकती है इसकी जिम्मेदारी भी हम सभी की है। 🙍में अवलोकन साझा करने से बार-बार दूर भाग रहा था, 🫣वो भी बिना किसी कारण के क्योंकि अवलोकन बहुत कुछ सीखाता हैं, तोड़ता भी है में उससे बच रहा था। जो भी गीता प्रतिभागी अवलोकन साझा करने से हिचकते हैं 📝बेझिझक साझा करें, क्योंकि यह हमारे अहंकार की ही चाल होती है जो उसे रोकती है कि में यह सब कैसे सीख सकता हूं? इतना ज्ञान मेरे लिए घातक होगा?,इतना प्रेम में खुद से कैसे कर सकता हूं? जो अभी भी बाहर निकलने से डरते हैं,नए अनुभवों से घबराते हैं विश्वास करिए यह डर झिझक कब गायब हो जाएगा पता भी नहीं चलेगा। ❤️तो ख़ुद से प्रेम करिए, संघर्ष के साथ। 🌴🌴🌴🏞️🏞️🏞️🏹🏹🏹❤️❤️❤️🔥🔥🔥


































