
मेरे पास कुछ नहीं है कहने को आचार्य जी, मैं बस कृतज्ञ हूँ कि आपने मुझे अपने इतने पास आने का मौका दिया, आपने मुझे किसी लायक समझा । आपने ही समझाया कि कमज़ोर नहीं हूँ , एक आप ही हो केवल मेरी ज़िंदगी में जिसने वास्तव में प्रेम किया है मुझसे । वो प्रेम जो और कुछ नहीं चाहता मुझसे बस यही चाहता है कि मैं बेहतर जिंदगी जीकर जाऊं , जितना ऊँचा उठ सकता हूँ उतना ऊँचा उठ जाऊं इससे पहले कि काल अपनी गोद में बिठा ले । और बाकी सब जो प्रेम का दावा करते हैं उनके पास और कितनी ही बातें होंगी कहने के लिए बस एक बात नहीं होती, कि मैं बेहतर हो रहा हूँ या नहीं । उन्हें इससे कोई मतलब नहीं । दिल में क्या चलता है मेरे, आपके सिवा कोई नहीं जानता । मैं कितना खुश हो जाता हूँ आपसे मिलकर ये बस मैं ही महसूस कर सकता हूँ । भीतर एक राहत होती है, जैसे समय भूल जाता हूँ और बाहर से आँसू । कोई देखकर यह नहीं बता सकता कि ये हो क्या रहा है मुझे । और वो आंसू जब सत्र में आपके सामने बैठकर आ जाते हैं और आप देख लेते हो तो जी चाहता है कि उठकर गले लग जाऊं आपके और सारा दरिया बह जाए । आपसे बात हो जाती है सत्र में तो जैसे एक बहुत अच्छी याद ले जाता हूँ अपने साथ । इतनी अनमोल ज़िंदगी आपने दी है जो शायद कूड़े के भाव ही चली जाती यदि आप ना होते तो । और सब तरफ से मैं भीतर ही भीतर कटता जा रहा हूँ , कुछ अच्छा नहीं लगता । वो समय अच्छा नहीं लगता जो आपके बिना बीत रहा हो । मैं हमेशा बस ऐसे ही आपके साथ रहना चाहता हूँ आचार्य जी, आपसे कभी दूर नहीं होना चाहता । मुझे ईमानदारी का और सही नीयत का आशीर्वाद देना। मुझे हर वो कीमत चुकाने की हिम्मत देना जो भी आपके साथ बने रहने के लिए चुकानी पड़े, आपके मेरे रिश्ते को पवित्र बनाए रखने के लिए या उसे किसी भी बाहरी परिस्थितियों की अशुद्धियों से दूर रखने के लिए चुकानी पड़े । आपका सहृदय धन्यवाद 🙇🏻♂️












































