
1️⃣ वेदांत में सत्य की ओर संकेत करने वाले शब्द जैसे ब्रह्म, आत्मा, सत्य, चैतन्य, आनंद, शांति, पूर्णता, साक्षी, अद्वैत, निर्वाण, कैवल्य, मोक्ष, तुरीय, अकर्ता, अभोक्ता, निर्गुण, निराकार, अजन्मा, अमर, अविनाशी, अनंत, असीम, निरपेक्ष, निर्विकार, निष्काम, निरहंकार, असंग, अचल, कूटस्थ, शुद्ध, बुद्ध, मुक्त, सत्, चित्, स्वप्रकाश आदि हैं। इनमें कई शब्द सकारात्मक प्रतीत होते हैं, लेकिन वे वास्तव में किसी वस्तु का वर्णन नहीं करते; वे संकेत मात्र हैं। “नेति-नेति” की नकारात्मक भाषा अधिक मूलभूत है। 2️⃣ मेरी भाषा पहले सकारात्मक होती थी—सत्य को किसी ऊँची अवस्था या उपलब्धि की तरह देखता था। अब समझ आता है कि नकार अधिक उपयोगी है, क्योंकि सत्य को पकड़ने के बजाय अपनी झूठी धारणाओं, अहंकार और आसक्तियों को छोड़ना है।



















