Arpita Sharmaजीवन को लेकर बहुत अनिश्चित हूँ, कुछ नहीं लिख पा रही कि जीवन में वर्तमान में इथाका क्या है, क्या है जो पाना चाहती हूँ.. 😖
हर दिन जो समझ…
अर्पिता जी, गौर करिए कि आप जिन दो चीज़ों को साथ रख रही हैं, वे एक ही दिशा में नहीं हैं। पढ़ना, जानना, समझना न छोड़ पाना, और साथ ही कहना कि हर दिन कुछ गिरता जाए — यह इकट्ठा करना और घटाना दोनों एक साथ नहीं चल सकते, जब तक यह न देखा जाए कि ज्ञान किसलिए जमा हो रहा है। जानकारी बढ़ाना अपने आप में छूटना नहीं है; वह तभी छूटना बनेगा जब हर नई समझ आपको अपनी किसी कमज़ोरी, किसी बहाने के सामने नंगा कर दे, न कि सिर्फ़ और विषयों से परिचित करा दे। यही वजह है कि इथाका अभी धुंधली लग रही है — क्योंकि प्रश्न वस्तु का नहीं, दिशा का है। साइकिलिंग में बेहतर होना ठीक है, पर पूछिए कि यह बेहतर होना किसे मजबूत कर रहा है या किसको कमज़ोर। यह देखिए कि आज आपने जो पढ़ा, उसने ठीक किस कमज़ोरी को आपके सामने नंगा किया — नाम लेकर बताइए अपने आप को।


















