
जो personal है, उसी की बात करनी है। अभी दो दिन पहले ही मैंने स्केटिंग सीखना शुरू किया है। यहाँ साझा करने से हिचक रही थी, क्योंकि कहीं न कहीं इसे मैं personal मानकर बैठी थी कि ये तो मेरे निजी जीवन की बात है, इसे क्या साझा करना? और अभी तो शुरू ही किया है। लेकिन आज के सत्र और सूचिका जी के सवाल पर हुई चर्चा ने कुछ याद दिला दिया। मुझे और मेरी बहन को वो चीज़ें करना बहुत पसंद था जो आमतौर पर लड़कियों के लिए ठीक नहीं मानी जाती हैं। स्केटिंग उन्हीं में से एक है। मुझे बचपन से ही सीखनी थी। लेकिन घरवालों ने ये कहकर मना कर दिया कि चोट लग जाएगी, वग़ैरह-वग़ैरह। सामने से कभी कहा तो नहीं, पर भीतर यही धारणा रही होगी कि शादी कौन करेगा फिर। और यह सिर्फ़ घर की लड़कियों के साथ नहीं था, लड़कों के साथ भी। बस पढ़ाई करो, बाक़ी हर चीज़ बेमानी है। यही वजह रही कि हमें कभी बताया ही नहीं गया कि परिवार में नेशनल प्लेयर तक रहे हैं क्योंकि खेल की कोई क़द्र ही नहीं थी। पढ़ो, बढ़िया नौकरी लगाओ, और सेटल हो जाओ, इतना ही तो करना होता है। और मानकर चलिए आप अपनी ज़िद से स्पोर्ट्स में चले भी गए तो यही उम्मीद रहती है कि मेडल आ जाए तो नौकरी मिल जाएगी। और जब मैंने स्केटिंग क्लास ढूँढनी शुरू कीं, तो पता चला कि ज़्यादातर क्लास बच्चों के लिए हैं, वयस्कों के लिए नहीं। थोड़ा और जानना चाहा कि वयस्कों में यह कम लोकप्रिय क्यों है तो समझ आया कि वयस्क गिरने से डरते हैं, कि चोट न लग जाए। और फिर एक चक्र बन जाता है: वयस्क करते नहीं दिखते, तो कोई और भी हिम्मत नहीं करता। कोई चीज़ लोकप्रिय होगी या नहीं, यह हम पर ही निर्भर करता है। और यही छोटी-छोटी बातें, यही मान्यताएँ मिलकर हमारी संस्कृति बनाती हैं। इसी का नतीजा था कि जब मैं स्केटिंग किट ख़रीदने गई, तो वहाँ भी बच्चों के लिए विकल्प ज़्यादा थे, वयस्कों के लिए बहुत कम। पर मुझे इससे फ़र्क़ नहीं पड़ा। मैंने कहा — बच्चों के साथ ही सही, पर सिखाइए। बच्चों के साथ सीखने में भला क्या दिक़्क़त हो सकती है? वयस्क होने का यह मतलब तो नहीं कि आपको सब आता है, या आना ही चाहिए। और सच में बिना स्पोर्ट्स के कुछ चीज़ें सीख ही नहीं सकते। संघर्ष, जुझारूपन, हार न मानना - सब स्पोर्ट्स से आ ही सकते हैं जीवन में। शरीर का विज्ञान भी हम खेल के माध्यम से ही बेहतर समझते हैं। और शायद जब शरीर को जानते हैं तभी उसे भूल भी पाते हैं।















































