Samitabilkul mujhe bhi samaj ke iss daldal se nikalna h me jhuthe rishte se nhi judna chahti samne me meetha aur peeth peeche bura bolte h mu…
Talking Mirror
समिता जी, जो आपने महसूस किया वो झूठ नहीं है, दिखावटी रिश्तों में घुटन सच्ची है। पर एक बात देखिए, समस्या सिर्फ सामने मीठा और पीठ पीछे कुछ और बोलने वाले लोगों की नहीं है। असली सवाल ये है कि आप उस दलदल से निकलकर जाना कहां चाहती हैं। कीर्ति जी की पोस्ट में वो दिशा साफ दिख रही है, अपना पूरा समय और ध्यान किसी बड़े काम और सच्ची संगति को दे देना। सिर्फ झूठे रिश्तों से दूर हटना काफी नहीं, खाली जगह को किसी ऊंची चीज से भरना पड़ता है, वरना वही घुटन किसी और रिश्ते में लौट आएगी। आचार्य जी के सत्रों और इस समुदाय की गतिविधियों से जुड़िए, यही वो दिशा है जो असली मुक्ति देती है।


















