
✍🏻 पोस्ट 9 | 21 अक्टूबर ’26 💭 विषय — इतिहास ───────────── 🩺 मेडिकल पढ़ाई के लिए लोगों को मारकर शव क्यों बेचे गए? पहला शव किसी हत्या का नहीं था। एडिनबरा में विलियम हेयर के यहाँ रहने वाला एक व्यक्ति मर गया। उस पर किराये का पैसा बाकी था। नुकसान की भरपाई के लिए हेयर और उसके साथी विलियम बर्क ने उसका शव बेच दिया। खरीदार था शरीर-विज्ञान पढ़ाने वाला रॉबर्ट नॉक्स। 💰 इस सौदे में कमाई दिखी। फिर दोनों ने लोगों के मरने का इंतजार करने के बजाय उनकी हत्या शुरू कर दी। 🏛️ उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में स्कॉटलैंड का एडिनबरा मेडिकल शिक्षा का बड़ा केंद्र था। शरीर के अंगों और उनकी बनावट को समझाने के लिए शिक्षकों को शव चाहिए थे। कानूनी तौर पर उपलब्ध शव जरूरत से कम थे। इससे कब्रों से शव चुराकर बेचने का कारोबार पनपा। बर्क और हेयर इससे भी आगे गए। 📜 University of Edinburgh के विवरण के अनुसार, 1827–1828 के दौरान दोनों ने कम-से-कम 16 लोगों की हत्या की और शव नॉक्स के निजी शरीर-विज्ञान विद्यालय को बेचे। हेयर सरकारी गवाह बनकर बच निकला। बर्क को 28 जनवरी 1829 को फाँसी दी गई। उसका शरीर भी चीरफाड़ के लिए मेडिकल स्कूल को सौंपा गया। नॉक्स पर हत्याओं में शामिल होने का मुकदमा नहीं चला। इसलिए यह कहना गलत होगा कि उसने लोगों को मारने का आदेश दिया था। 🔎 यहाँ हत्यारों का उद्देश्य चिकित्सा की सेवा नहीं, कमाई था। मेडिकल पढ़ाई के लिए शवों की माँग उस कमाई का बाजार बनी। 🪞 इतिहास की ऐसी कहानियाँ केवल अतीत का अपराध नहीं दिखातीं। हमारी अपनी वृत्तियों को उनके भयावह विस्तार में सामने रखती हैं। शवों का बाजार था। खरीदार था। पैसा मिल रहा था। बर्क और हेयर को उसमें अपना फायदा दिखा। फिर लोगों के मरने का इंतजार भी क्यों करें? 🔎 यही अहंकार का हिसाब है: अवसर दिख रहा है, तो मैं क्यों पीछे रहूँ? अपना लाभ बढ़ाने की इस दौड़ में दूसरे का जीवन भी बाधा बन गया। शवों की आपूर्ति तेज हुई। कमाई का रास्ता बना। लेकिन दक्षता बढ़ी किस उद्देश्य के लिए? किसी काम को जल्दी और कुशलता से कर लेना उसके उद्देश्य को उचित नहीं बना देता। उद्देश्य में शोषण है, तो बढ़ी हुई क्षमता उसी शोषण को और प्रभावी बनाती है। छोटे से लाभ के लिए दूसरे का नुकसान हिसाब से बाहर रखने की शुरुआत क्या हम भी नहीं करते? अपना खर्च बचा लिया। काम जल्दी निकलवा लिया। दूसरे ने उसकी क्या कीमत चुकाई, यह पूछना जरूरी नहीं लगा। 💬 इतिहास के इन अपराधियों को पहचान लेना आसान है। अपने छोटे लाभ के लिए दूसरे की हानि स्वीकार करते समय मैं कौन-सी सफाई पकड़ता हूँ? A. “बाजार ऐसे ही चलता है, मैं अकेला क्या करूँ?” B. “मौका मैं छोड़ दूँगा, तो कोई और फायदा उठा लेगा।” C. “मेरा काम हो रहा है, बाकी बातें मेरी जिम्मेदारी नहीं।” D. “इतने छोटे नुकसान को शोषण कहना ज्यादा हो जाएगा।” बड़े अपराध से अपनी दूरी गिनने के बजाय, अपने भीतर उसके शुरुआती हिसाब को देखने और छोड़ने की नीयत है? स्रोत: University of Edinburgh — Burke and Hare https://medicine-vet-medicine.ed.ac.uk/about/history/burke-and-hare National Library of Scotland https://www.nls.uk/collections/stories/scottish-history/burke-and-hare-at-the-library/

















































