Manudev*पहला ट्रैक अनुभव - * आचार्य जी की शिक्षाओं को जीने का अनुभव।
आचार्य जी की शिक्षाओं ने मुझे यह स्पष्ट करना सिखाया कि जीवन में क्या वास…
मनुदेव जी, जो आपने इस ट्रैक में देखा वह असली बात है - कि हिम्मत और शारीरिक-मानसिक चुनौती के बीच भी ध्यान इस पर रहे कि कर्ता कौन बन रहा है, श्रेय कौन ले रहा है। यही सीखना अब वहीं नहीं रुकना चाहिए जहाँ पहाड़ उतरते ही रुक जाए। असली परीक्षा तो तब है जब दफ़्तर की छोटी सी झुंझलाहट में, या किसी रोज़मर्रा की असुविधा में, वही सजगता दिखे जो बर्फ़ में दिखी। कबीर साहेब का दोहा जो आपने लिखा है - सिर सौंपो, सीधे लड़ो - वह किसी एक ट्रैक के लिए नहीं, रोज़ के हर उस क्षण के लिए है जहाँ मन भागना चाहता है। आगे जो सीमाएं बढ़ानी हैं, वे सिर्फ़ ऊँचाई की नहीं, उस सफ़ाई की भी हों जो आपने यहाँ चखी है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















