
आचार्य जी नमस्ते, गीता सेशन से जुड़ने से पहले मै इच्छा, द्वेष,मोह से घिरी हुई थी और शायद इसी कारणों से मेरा मन हमेशा परेशान रहता था। कभी भविष्य की चिंताओं मे जो हुआ नहीं अभी उसके लिए विचार करना।
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आचार्य जी नमस्ते, गीता सेशन से जुड़ने से पहले मै इच्छा, द्वेष,मोह से घिरी हुई थी और शायद इसी कारणों से मेरा मन हमेशा परेशान रहता था। कभी भविष्य की चिंताओं मे जो हुआ नहीं अभी उसके लिए विचार करना।

प्रिय जी, यह देखना ही बड़ी बात है कि मन जो परेशानी भविष्य की कल्पनाओं में उलझा रहता था, वह दरअसल इच्छा और द्वेष से घिरा होने का नतीजा था। अब जो देख लिया है उसे आगे बढ़ाइए - जब अगली बार मन फिर किसी काल्पनिक भविष्य में चिंता बुनने लगे, तो वहीं रुककर पूछिए कि अभी, इसी क्षण में, वास्तव में कमी कहाँ है। यही देखना आपको धीरे-धीरे उस घेरे से बाहर निकालता रहेगा। गीता सेशन से जुड़े रहिए, यह देखना वहीं और गहरा होगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401