
✍🏻 पोस्ट 15 | 29 सितंबर '26 💭 विषय — मनोविज्ञान ───────── 🌪️ आफ़त सामने हो, फिर भी नज़र क्यों नहीं आती? मान लीजिए पहाड़ से लगातार मलबा गिरने की खबरें आ रही हैं। रास्ते असुरक्षित हो चुके हैं। प्रशासन चेतावनी दे चुका है। फिर भी कोई कहता है, “अभी तो सब ठीक है। देखते हैं।” यह सिर्फ़ लापरवाही नहीं है। मनुष्य में एक प्रवृत्ति होती है जिसे नॉर्मल्सी बायस कहा जाता है। 🧠 हम अपने रोज़मर्रा के जीवन से ऐसी अपेक्षाएँ बना लेते हैं कि चीज़ें सामान्य ही चलती रहेंगी। इसलिए जब कोई असामान्य खतरा सामने आता है, तो उसे तुरंत स्वीकार करना कठिन लगता है। आफ़त आ गई, फिर भी आदमी अपना सामान समेटता रहता है। जगह छोड़ने का समय आ गया, फिर भी वह सोचता है, “थोड़ी देर और देखते हैं।” क्यों? क्योंकि जिस जीवन को हमने सामान्य मान लिया है, उसे छोड़ना आसान नहीं होता। 👥 दूसरे लोग नहीं जा रहे, तो हमें भी खतरा उतना बड़ा नहीं लगता। हमें किसी दूसरी पुष्टि का इंतज़ार रहता है कि सचमुच कुछ गंभीर हुआ है। और अपनी जगह, अपना काम, अपनी दिनचर्या छोड़ना असुविधाजनक लगता है। लेकिन बात केवल किसी घर या जगह को छोड़ने की नहीं है। हम अपनी पूरी सामान्य ज़िंदगी से भी ऐसे ही चिपके रहते हैं। 🏠 हमें अपना वही जीवन चाहिए। वही सुविधाएँ। वही उपभोग। वही आदतें। खतरा दिखाई दे रहा है, फिर भी हम कहते हैं, “अभी तो चल रहा है।” जलवायु संकट को ही देखिए। कार्बन उत्सर्जन के पर्यावरणीय प्रभावों की चेतावनियाँ लंबे समय से सामने हैं, फिर भी हमारी जीवनशैली और ऊर्जा-व्यवस्था में आवश्यक गति और पैमाने पर बदलाव नहीं आया है। क्योंकि अभी तो काम चल ही रहा है। 🌍 तो नॉर्मल्सी बायस हमें क्या दिखाती है? शायद यह कि हमने अपने बंधन को ही अपना घर मान लिया है। जिस तरह हम जीते आए, आसपास के लोगों को जीते देखा, उसी को जीवन मान लिया। आदत इतनी गहरी है कि ऊँचाई दिखाई ही नहीं देती। 🕊️ और जब ऊँचाई का परिचय ही नहीं हुआ, तो पिंजरे से घृणा कैसे पैदा होगी? “Love for the Sky expresses itself as disgust for the cage.” ~ Acharya Prashant अगर आकाश से परिचय ही नहीं हुआ, तो पिंजरा हमें पिंजरा क्यों लगेगा? ☁️ हमने सुविधाओं को जाना, स्वतंत्रता को नहीं। आदतों को जाना, ऊँचाई को नहीं। जीवन चलाना सीखा, जीवन से प्रेम नहीं। ❤️ शायद इसलिए हम loveless हैं। प्रेम अपने-आप नहीं आ जाता। पहले आकाश का परिचय होना पड़ता है। तभी पिंजरे की सीमाएँ दिखाई देती हैं और उसे छोड़ने की इच्छा पैदा होती है। 🔥 फिर बात नीयत पर आती है। क्या आप उसी सुविधाजनक जीवन में छिपे रहना चाहते हैं, या प्रेम को अभिव्यक्ति देना चाहते हैं? स्रोत: https://thedecisionlab.com/biases/normalcy-bias
















































