
Abhay Panda
मैं भी यही कर रहा हूँ जब भीड़ के साथ होता हूं
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मैं भी यही कर रहा हूँ जब भीड़ के साथ होता हूं

अभय जी, भीड़ के साथ होना और उसके साथ होना पकड़ में आना, दोनों एक ही पल में घट गए। यही वो आधी सेकंड है जहाँ फिल्म का जूरी नंबर आठ खड़ा होता है, जबकि बाकी ग्यारह घर जाने की जल्दी में अपना हाथ उठा चुके होते हैं। अगली बार जब भीड़ में खड़े हों, यही पकड़ वहीं क्या बोलती है? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401