
Priti Choudhary
अब ये साफ हो रहा है कि कौनसे फैसले लोगों की अपेक्षाओं से लिए और कौनसे खुद ने अपने लिए लिए 🙏🙏
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अब ये साफ हो रहा है कि कौनसे फैसले लोगों की अपेक्षाओं से लिए और कौनसे खुद ने अपने लिए लिए 🙏🙏

प्रीति जी, यह साफ़ होना शुरुआत है, अंत नहीं। जो दिखा वह यह था कि कितने फैसले अपेक्षाओं से आए — अब असली काम यह देखना है कि वह अपेक्षा कहाँ से इतनी ताकत पाती है कि अपना निर्णय लगने लगे। जिस फैसले को आपने "अपना" समझा था, उसे दोबारा देखिए: क्या वहाँ कोई डर छुपा था, अकेले पड़ जाने का, या किसी की नज़र में गिर जाने का? साफ़ देखना तभी पूरा होता है जब पता चले कि किस फैसले की कीमत चुकाने को आप आज भी तैयार नहीं हैं। यह देखना एक बार का काम नहीं, रोज़ का अभ्यास है। आप अपने अगले छोटे-से-छोटे फैसले पर भी यही सवाल रखकर देखिए।