
✍🏻 पोस्ट 6 | 3 सितंबर '26 💭 विषय — विश्व दर्शन ────────── 🐈 बिल्ली मत पालना एक कहानी सुनिए... 🌳 एक साधु जंगल में रहता था। 🐭 एक चूहा उसकी लंगोटी कुतर देता था। लोगों ने कहा, 🐱 “महाराज, बिल्ली पाल लीजिए। चूहा भाग जाएगा।” साधु ने बिल्ली पाल ली। 🥛 अब बिल्ली के लिए दूध चाहिए था। लोगों ने कहा, 🐄 “गाय रख लीजिए। दूध भी मिलेगा और बिल्ली भी पल जाएगी।” गाय आ गई। अब गाय की देखभाल के लिए समय चाहिए था। 👩🏻 एक नौकरानी रख ली गई। फिर जंगल में एक पुरुष साधु के पास रोज़ आने वाली स्त्री को देखकर लोगों ने कहा, 💍 “महाराज, शादी ही कर लीजिए।” और देखते ही देखते... जिस साधु के पास सिर्फ़ एक चूहे की समस्या थी, उसके पास 🐱 बिल्ली, 🐄 गाय, 👩🏻 नौकरानी और फिर पूरा गृहस्थ जीवन आ गया। सवाल यह नहीं था कि उसके पास कम था। सवाल यह था कि उसने अपनी परेशानी का समाधान उसी दिशा में खोजा, जिसने परेशानी को और बढ़ा दिया। हम भी अक्सर यही करते हैं। हमें लगता है, “बस यह एक चीज़ और मिल जाए, फिर मैं पूरा हो जाऊँगा।” लेकिन वह “एक चीज़” कभी आख़िरी नहीं होती। 🔄 एक चीज़ दूसरी चीज़ को खींचती है। 🔄 एक इच्छा दूसरी इच्छा पैदा करती है। 🔄 और धीरे-धीरे हम उन्हीं चीज़ों के बोझ में दब जाते हैं, जिन्हें कभी सुख का साधन समझकर इकट्ठा किया था। कबीर साहेब कहते हैं: 🌊 “पानी में घर मीन का, क्यों मरे पियास।” मछली पानी में ही रहती है, फिर भी प्यास की कल्पना कर रही है। हमारी स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। ❓ जिसे हम बाहर खोज रहे हैं, क्या सच में उसकी कमी है? कबीर साहेब की बात में इसलिए एक दूसरी तरह की आशा दिखाई देती है: 🙏🏻 “आशा तो गुरुदेव की, दूजी आस निरास।” एक आशा और पाने की नहीं, बल्कि अनावश्यक को छोड़कर हल्का होने की। 🕊️ कुछ अधिक पाना नहीं जो बोझ अनजाने में जोड़ते गए हैं, उन्हें पहचानकर छोड़ते जाना। ❓ इस कहानी से आपने क्या सीखा? A. जीवन की हर समस्या का समाधान कुछ नया पाने में है। B. एक इच्छा पूरी होने के बाद अगली इच्छा अपने आप खत्म हो जाती है। C. बिल्ली मत पालना D. संसार की सभी वस्तुएँ त्याग देना ही मुक्ति है। स्रोत: https://acharyaprashant.org/en/articles/paani-mein-ghar-meen-ka-kahe-marey-pyaas--sant-kabir-par-1_2365df8











































