
Roma kuari
बहुत से चुनाव ऐसे पहले रहे है ओर अभी भी होते है पर अभी रुकती हूं ओर देखने का प्रयास करती हूं उस पर कई बार सवाल करती हूं
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बहुत से चुनाव ऐसे पहले रहे है ओर अभी भी होते है पर अभी रुकती हूं ओर देखने का प्रयास करती हूं उस पर कई बार सवाल करती हूं

रोमा जी, रुककर खुद से सवाल करना वाकई काम की चीज़ है, पर यहाँ एक बात और देखने की है — रुकना किस वजह से हो रहा है। गधे की कहानी में असली समस्या यह नहीं थी कि वह सोच रहा था, समस्या यह थी कि सोचना ही बहाना बन गया था चुनने से बचने का। तो अपने उन अटके निर्णयों पर देखिए कि क्या आपका रुकना स्पष्टता की तलाश है, या गलत साबित होने के डर से टालना है। सवाल पूछना तभी काम आता है जब वह किसी निर्णय तक पहुँचाए, वरना वह भी एक सुरक्षित घेरा बन जाता है जहाँ बैठे रहना आसान लगता है।