SEEMAआपके कितने निर्णय इसलिए अटके हैं क्योंकि आप गलत चुनाव की ज़िम्मेदारी नहीं लेना चाहते?
ans: ofcourse, गृहस्थ जीवन का चुनाव।
Talking Mirror
सीमा जी, ध्यान दीजिए कि यहाँ गधे की कहानी में समस्या दो घासों में फ़र्क़ खोजना नहीं थी, समस्या यह थी कि चुनने वाला चुनना ही नहीं चाहता था, क्योंकि चुनने के साथ ज़िम्मेदारी आती है। गृहस्थ जीवन के चुनाव में भी देखिए, क्या सच में दो विकल्प बराबर अच्छे दिख रहे थे, या भीतर कहीं यह डर था कि जो भी चुना जाए, बाद में उसका हिसाब आप पर आ जाएगा? जो अटका रहता है वह विकल्प नहीं, वह यह स्वीकार करना है कि चुनाव मेरा था, नतीजा जो भी निकला। क्या अब भी वही झिझक किसी और निर्णय को रोके हुए है?


















