
दो महीने अविस्मरणीय, ऊँची संगत और निरंतर ख़ुमारी गोवा में होने का फ़ायदा मुझे पिछले 3,4 सालों से आचार्य जी की शारीरिक उपस्थिति और सत्रों के आयोजन से अद्भुत रूप से मिला है। अगस्त, सितंबर 2026 में ख़ूब सत्र हुए। सत्रों में शामिल हुआ, स्वयंसेवक के रूप में काम किया। बहुत सारे नए-पुराने गीता प्रतिभागी मिले, बहुत सीखा और अथक मेहनत में भी भरपूर आनंद 😊। वास्को दा गामा से सत्र स्थलों तक की सारी यात्राएँ बाइक पर की। 24 घंटे काम किया ताकि दूसरा दिन सत्र में शामिल हो पाऊँ। इन दिनों में स्वयं की कमजोरियाँ दिखी पर साथ ही अहंकार को दर्पण। HIDP (Holistic Individual Development Programme) भी बहुत ख़ास था। अंतिम सत्र के बाद जैसे ही आचार्य जी गए, रोना आ गया कि अब आचार्य जी की शारीरिक अनुपस्थिति खलेगी। PAF साथी सामान और बाक़ी चीजें समेट रहे थे, तो विदाई जैसा माहौल हो गया था। लेकिन ख़ुमारी अभी भी नहीं टूट रही है। भजनों के बोल हृदय में बज रहे हैं। अब जल्दी ही नवंबर में साहब से मिलूँगा।🙏 एक और बात - जो सत्रों से चूक रहे हैं वो जीवन से चूक रहे हैं। जिन सतगुरु पहचाना नहीं, उनको कहीं भी ठिकाना नहीं।








































