
VIKAS TANEJA
D. करता तो A या B हूँ, लेकिन यहाँ C चुनूँगा अपनी छवि भी तो बचानी है!
Post
1 comment
D. करता तो A या B हूँ, लेकिन यहाँ C चुनूँगा अपनी छवि भी तो बचानी है!

विकास जी, यही तो रक्तबीज की चाल है, पकड़ी आपने ठीक है। 'C' का विकल्प चुन लेना भी एक नया असुर बन सकता है - अब छवि यह बन गई कि "मैं अपनी बेईमानी को पहचान सकता हूँ, इसलिए मैं वैसा नहीं हूँ जैसा बाकी लोग हैं जो A या B करते हैं।" देखिए, D चुनकर आपने एक परत उतारी और उसके नीचे फौरन दूसरी पहन ली। असली सवाल यह नहीं कि किस विकल्प पर टिक लगे, बल्कि अगली बार जब कोई तर्क सच में आपकी किसी पुरानी मान्यता को हिलाएगा, उस क्षण क्या होता है - वह जाँचना है, लिखकर उसका उत्तर यहाँ तय नहीं होता। कौन सी पहचान है जिसे आप अभी इतनी होशियारी से बचा रहे हैं कि बचाव दिख भी नहीं रहा?