
पहेली तस्वीर में मेरी छोटी बेटी हिमानी है। उनके हाथों में जो चित्र है वो चित्र एग्जीबिशन में हिस्सा लिया है उसके लिए बनाया है। एग्जीबिशन दूसरे शहर में 10 वे महीनेमे है। दूसरी तस्वीर में जो पुरस्कार मिले हैं वो पिछले दो सालों में चित्र स्पर्धा में मिले हैं। आचार्य जी की भी कई तस्वीरें बनाई है और भेट भी दी है। चित्र के अलावा हिमानी केसियो पर कबीर साहब के भजन गा कर बजाती है। डांस में भी कई बार हिस्सा लिया है और पुरस्कार भी मिले है। खेल में स्केटिंग सीखती है और बेड मिन्नटन भी खेलती हैं। उसके साथ पढ़ाई में पिछले तीन साल में 99+%के साथ स्कूल में फस्ट आईं हैं। ये सब एक दिन में नहीं हुआ है ये सब आचार्य जी की संगति के फल स्वरूप है। पहले मेरे पति आचार्य जी के गीता सत्रों से जुड़े।उनके जुड़े हुए 3 साल से ज्यादा समय हुआ है। उस दौरान कई बार झगड़े भी हुए। फिर भी उन्होंने अपना प्रयास जारी रखा। कई बार रात को दो दो घंटे एक छोटे बच्चे को समझाते हैं उसी तरह आचार्य जी की बाते रखते थे। कभी भी थोपने की कोशिश नहीं की। आखिर कार मुझे थोड़ी समझ आई और मुझे गीता सत्रों से जोड़ा। मुझे भी गीता सत्रों से जुड़े हुए 2 साल से ज्यादा समय हुआ। फिर कभी आज दिन तक कभी तकरार हुई ही नहीं। सचमुच पति पत्नी सही संगति का चुनाव करते हैं तो सिर्फ पति पत्नी के बीच नहीं पूरे परिवार में विवेक आ जाता है। आचार्य की संगति से हमे अमूल्य पुरस्कार मिला है जो हमारे बच्चों में झलक रहा है। आचार्य जी धन्यवाद के लिए शब्द छोटे हैं बस 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏





































