GEETA PATELसीमाएं जो मैंने मेरे बारे में बनी धारणा के कारण स्वीकार की है -
मेरी शिक्षा हिन्दी माध्यम से हुई है, रीडिंग और ग्रामर में अंग्रेजी भाष…
गीता जी, कल का अंग्रेज़ी सत्र समझ में आ गया, ये आपने खुद लिखा है। यानी भाषा वहाँ रुकावट नहीं थी। फिर भी धारणा वही पुरानी बनी रही, समझने में समय लगेगा, 3D कल्पना नहीं बनेगी। धारणा सच से नहीं टूटती, वो तो तभी टूटी जब आपने खुद उसे परखा। और अनुदान को जो सामने रखा, वो भी वैसी ही एक धारणा निकली, क्योंकि अगली ही पंक्ति में आपने खुद कहा असली बात नीयत की कमी है, पैसे की नहीं। ये देखना आसान नहीं था, आचार्य जी जो आपकी आज़ादी के लिए कर रहे हैं, उसके सामने आने से खुद को रोकना, और रिपोर्ट कार्ड को सुधारने के बजाय बढ़ाते जाना, यही आपने नाम लेकर कहा। तो अब सवाल सीमा का नहीं रहा, गीता जी। सवाल ये है कि जो आड़ अब खुद गिर चुकी है, उसके आगे अब कदम कब बढ़ता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















