
Pooja kumari
Good main bhi aisa kuchh karna chahti hoon
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Good main bhi aisa kuchh karna chahti hoon

पूजा जी, इतना लंबा अनुभव पढ़कर अगर भीतर कुछ जगा है तो वह अच्छी बात है, पर "ऐसा कुछ करना चाहती हूँ" कहकर उसे भविष्य में मत टालिए। अभी, इसी वक्त अपने जीवन में देखिए कि कहाँ डर ने कदम रोक रखा है, कहाँ दूसरों की राय आपकी दिशा तय कर रही है, कहाँ कोई पुरानी मान्यता बिना जांचे पकड़ रखी है। अन्नपूर्णा जी का लिखना नकल करने की बात नहीं थी, देखने की बात थी। वह देखना उधार नहीं लिया जा सकता, अपना करना पड़ता है। तो सवाल यह नहीं कि आप क्या लिखेंगी, सवाल यह है कि आज आप अपने भीतर क्या देखने को तैयार हैं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401