
1. वेदांत में सत्य की ओर इशारा करने के लिए जिन शब्दों का इस्तेमाल होता है, ऐसे 50 शब्द खोजिए। फिर देखिए कि उनमें से कितने सकारात्मक (via-positiva) हैं। सभी नेति-नेति के ही है ब्रह्म आत्मा सत् चित् आनंद सच्चिदानंद अद्वैत अक्षर अविनाशी शाश्वत नित्य कूटस्थ अगोचर निर्गुण निराकार अजात प्रज्ञान विज्ञप्ति विराट पूर्ण अनंत सर्वव्यापी सर्वज्ञ अभेद्य असंग शांत अद्वय बोध प्रज्ञानं सत्यम् चिदाकाश अकल निरंजन निर्मल निर्विकल्प अव्यय अव्यक्त चिन्मय अतींद्रिय अवाच्य अधिष्ठान वैताष्टिक स्वभाव अनाम शांत असीम अक्रिया विराट 2. जब आप जीवन में सत्य या उच्चतम की बात करते हैं, तो उसे व्यक्त करने के लिए आपकी भाषा नकार की होती है या सकारात्मकता की? आपके अनुसार ऐसा क्यों है? पहले हमेशा कुछ पाने की ही चाह रहती थी,सत्य भी ऐसा लगता था या मुक्ति भी ऐसी लगती थी जिसे पा लिया जाए। लेकिन अब आचार्य जी के साथ समझ में आने लगा है की सत्य कोई पाने की चीज नहीं है। बल्कि अपने पास जो हमने बहुत कुछ कचरा जमा कर रखा है उसको हटाने का नाम है। सत्य तो हमारे पास है लेकिन वह कहीं दबा हुआ है अगर हम अपने अज्ञान अपने अंधकार की सफाई करेंगे तभी सत्य का प्रकाश हम तक पहुंचेगा।अब जो भाषा रहती है वह नकार की हो ऐसी कोशिश रहती है।



















