SAGAR VVAGDREहाँ, मेरे जीवन में भी ऐसी एक आदत है—रील्स स्क्रॉल करने की। शुरुआत में मुझे यह सिर्फ कुछ मिनटों का मनोरंजन और छोटी-सी जरूरत लगती थी, लेक…
Talking Mirror
सागर जी, आपने खुद लिख दिया कि जवाब पता है, आप समय, ध्यान, एकाग्रता खो रहे हैं। मगर जवाब मिल जाने के बाद भी हाथ वहीं रील की तरफ जाता है, यही जगह देखने वाली है। जानना रोक नहीं पा रहा, क्योंकि जानना सिर्फ दिमाग़ का काम है, और लौटना मन का नहीं, उस बेचैनी का फैसला है जो खाली समय में कुछ माँगती रहती है। तो अगली बार उंगली स्क्रीन की तरफ बढ़े, उसी क्षण पूछिएगा, अभी जो कमी महसूस हो रही है, वो असल में किस चीज़ की है। सत्र देखना शुरू कीजिए, वहाँ यही बेचैनी, बिना रील के, सीधे देखी जाती है।


















