
हाँ मैं यह बहुत साफ साफ देख पा रहीं हूं कि मैं चाहती थी कि मेरी शादी हो जाए जिस इंसान से मैं चाहती हूं जो भी हमने मिलकर decide किया है उसी के हिसाब से आगे की जिंदगी जिएंगे वो काम करेंगे लेकिन जब शादी हो गयी ठीक ही चल रही थी खुशी भी थी और दुख भी की बहुत कर्ज हो गया था और पति जॉब भी नहीं krta था इस vajah से परिवार मे तनाव का माहौल rehta जैसे हमने decide किया था वैसा तो कुछ हो ही नहीं रहा क्योंकि अहंकार ने कुछ और पकड़ रखा था l कभी कभी समझ नहीं आता कि क्या मैं ये गलत चाहती हूं कि मैं अपनी पढ़ाई पूरी करूं, मैं जॉब करूं, अपने मुताबिक स्वतंत्र फैसला लूँ, क्या इसमे bhi मेरा अहंकार स्वार्थ जुड़ा है क्या मुझे ये नहीं करना चाहिए l



















