
मैं आज अपने मन की चाल के बारे में सच सच बताऊंगी जो मेरे साथ होता है। कभी कभी मैं सोचती हूं , (किसी अच्छे विचार को लेकर) कि यह कितनी महत्वपूर्ण बात है इसको लोगों तक पहुंचना चाहिए, और फ़िर सोचते सोचते मन अपनी धूर्तता दिखा ही देता है, उस एक अच्छी बात को अभी शेयर भी नहीं किया, कि मन क्या क्या बकने लगता है , उसकी सुने तो, 🤪 हां लोग यह पोस्ट देखेंगे तो, सोचेंगे कि अरे ये कितनी ज्ञान की बातें करती है 😊 यह तो बहुत धार्मिक होगी! इसे तो बहुत कुछ पता है 🤔 यह ऐसे ही नहीं है 🤔😎 और फ़िर मै देखती हूं कि ये मैं कहां खो गई 🙄😂 तब मैं उस अच्छी पोस्ट को शेयर करने का विचार ही त्याग देती हूं, क्योंकि ऐसा करने पर मेरा अहंकार पुष्ट होता है तो मैं नहीं करती, फिर सोचती हूं, कि ऐसे तो मैं लोगों कोर कुछ बता ही नहीं पाऊंगी, और सच में बताने का बहुत मन होता है,पर अहंकार को परे रख कर, बस यह अहंकार है जिसने मुझे उलझाए रखा है । आज मैंने अपने भीतर अहंकार की चाल को देखा। अब अभ्यास यही है कि मैं इस प्रवृत्ति को पहचानते हुए सही कार्य कर सकूं 😊🙏🏻



















