
आज नया दिन है मेरे लिए , नए कार्य स्थल पर पहला दिन । यहाँ मैं बैठा हूँ तो महसूस हो रहा है कि इसका श्रेय सिर्फ और सिर्फ एक व्यक्ति को जाता है – और वो हैं आचार्य जी ! “ गलत नौकरी में हो तो गलत नौकरी छोड़ो, गलत शहर में हो तो गलत शहर छोड़ो, व्यापार करते हो तो और ज्यादा मेहनत करो युक्ति लगाओ प्रयोग करो....बदलो जीवन अपना ” यहाँ मैं आ पाया अपने पुराने कार्यस्थल को छोड़ पाया जो कि सिर्फ एक बोझ था... जहाँ सिर्फ मैं अपना समय और अपनी ऊर्जा बर्बाद कर रहा था – ये सिर्फ आचार्य जी के कारण हो पाया है । जो मेरा खुद का भी सपना था कि जहां भी जाऊंगा – अपने हक का, अपनी मेहनत का कमाऊंगा, किसी से आग्रह करके या तैयारी में भी किसी की मदद लेकर या किसी के रेफरेंस से बिल्कुल नहीं करूंगा कुछ भी । मेरे गुरु ने रीढ़ दी है मुझे, इसके झुकने का सवाल ही नहीं उठता दुनिया के सामने । मुझे खुशी है कि यह सारा काम सिर्फ खुद मेहनत करके मैं कर पाया और सारी मदद बस आचार्य जी ने की है मेरी, खराब नौकरी से उन्होंने ही बाहर निकाला है मुझे – “गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है, गढ़ी गढ़ी काढ़े खोट । अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट ।।” आज यहां बैठा हूँ मैं बस बार बार दिल भर आ रहा है और केवल आचार्य जी के प्रति कृतज्ञता महसूस हो रही है । और इस पूरी यात्रा में मैने अनुभव किया है कि बहुत कुछ टूटता है, गुरु के प्रति विरोध भी उठता है पर ये ही इस बात का द्योतक है कि कुछ वाकई में सही देखा है, वाकई आज पहली बार वो चेहरा हमारा हमे देखने को मिला जो असली है – जो एक धारणा से नहीं बल्कि तथ्य से दिखाई दिया, और ये दिखना आशीर्वाद है बस गुरु का । गुरु जब देता है या उनके कारण हम सफल होते हैं तब तो हमें बहुत अच्छे लगते हैं गुरु लेकिन जब सब टूट रहा हो और हर सहारा हटा दे गुरु और गिरने दे तुम्हें तब वास्तव में तुम्हारी नियत क्या है वो पता चलती है । “दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे ना कोय । जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय ।।” आपका बहुत बहुत धन्यवाद आचार्य जी मेरे जीवन में आने के लिए । बस कृतज्ञ हूँ ।





















