
आकर्षक होना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। अगर आकर्षण केवल शरीर को देखने या उससे सुख पाना है, तो इसमें आपका वास्तविक विकास कहाँ है ? मैं कॉलेज में था, तब मेरे साथ रहने वाला दोस्त काला दीखता था। पर वह भाषण देना बहुत खास जानता था। उससे कॉलेज में सब आकर्षित होते थे वह भाषण देने के वजह से। पर वह अपने शरीर को गोरा करने के लिए बहुत पैसे खर्च करता था। मुझे भी उस वक्त वह सही कर रहा है ऐसा ही लगता था। आज समझ रहा हूं उसने कितना सारा पैसा उसमे गवां दिया है। मेरी खुद की बहन भी जितना पैसा गोरा होने के लिए लगा दिया था उतने में अच्छी कॉलेज से सीखना हो सकता था। आज मैं देख रहा हूं कि उसके मन में भी गलत धारणा बैठा दी गई थी। आज भी वह उस धारणा को नहीं छोड़ रही। मैने भी अपने जीवन में कई बार कपड़े खरीदी किए उसका कारण मुझे अच्छा दिखना था काम की जगह पर। पर वास्तविक उसकी जरूरत नहीं थी।



















