
5 सितंबर को गोवा में जन्माष्टमी महोत्सव के दूसरे दिन आचार्य जी के साथ भगवद्गीता का सत्र हुआ। सत्र शुरू होने से पहले लोगों ने मिलकर भजन गाए और साथ में नृत्य भी किया। इस सत्र में आचार्य जी ने भगवद्गीता के एक श्लोक को समझाते हुए बताया कि किसी विषय को चाहना कामना है, पर अपने ही मिट जाने को चाहना प्रेम है। उन्होंने कहा कि कामना के पीछे भागकर जो कुछ भी मिलता है, वह मिलते ही ख़त्म होने लगता है- और यह बात किसी सांत्वना की नहीं, बल्कि एक साफ़ चेतावनी की तरह है। देवताओं की भक्ति करोगे तो वही मिलेगा जो माँगा है, पर श्री कृष्ण की भक्ति में असल में मिलना है खुद से मुक्ति। सत्र के बाद बुक-साइनिंग हुई, जिसमें आचार्य जी ने 102 डिग्री बुखार होने के बावजूद देर रात तक लोगों की किताबों पर हस्ताक्षर किए। लोग अपनी किताबें साइन करवाने और उनकी एक झलक पाने के लिए लंबी क़तारों में खड़े रहे। लोगों ने आचार्य जी से उनके स्वास्थ पर ध्यान देने का अनुरोध किया और उनके प्रति अपनी कृतज्ञता भी व्यक्त की। गोवा में सितंबर भर हर वीकेंड Weekend With Master शिविर होते रहेंगे, और 12, 13, 14 सितंबर को तीन-दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव भी आयोजित होगा। अक्टूबर में आचार्य जी दिल्ली-एनसीआर लौटेंगे, जब वहाँ भी Weekend With Master शिविर फिर से शुरू होंगे।



















